राजस्थान की राजनीति में पूरी तरह सक्रिय हैं वसुंधरा राजे, मोदी-शाह से अलगाव की खबरें सर्वथा निराधार

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जयपुर। राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को लेकर इन दिनों कई तरह की अफवाहों का दौर जारी है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो भारतीय जनता पार्टी का केन्द्रीय नेतृत्व वसुंधरा राजे को धीरे-धीरे सक्रिय राजनीति से दूर धकेल रहा है। कुछ राजनीतिक पंडित सूत्रों का हवाला देकर राजे की अमित शाह और प्रधानमंत्री मोदी से तनातनी का दावा कर रहे हैं। तो वहीं कुछ स्वयंभू सियासतदार प्रदेश में घटित घटनाक्रम से राजे को सरोकार नहीं होने का दावा कर रहे हैं। इन दावों में कितना दम है ? यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। लेकिन फिलहाल हम आपको रूबरू करवाएंगे उस सच से जिसे झूठलाकर कुछ राजनीति परस्त मीडिया घरानों ने एक षड़्यंत्र के तहत वसुंधरा राजे के खिलाफ माहौल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई है।

किसी भी घटना व कार्यक्रम में सबसे पहले पहुंचती हैं राजे
भले ही कुछ राजनीति परस्त मीडिया घराने वसुंधरा राजे को राजस्थान की सक्रिय राजनीति से दूर बता रहे हो, लेकिन सच्चाई यही है कि प्रदेश में घटित किसी भी घटना व पार्टी कार्यक्रमों में राजे की उपस्थिति 100 फीसदी रही है। बात करें कुछ ताजा घटनाओं की तो बाड़मेर के जसोल में पांडाल गिरने से मरने वालों के परिजनों से मिलने पहुंचने वाले भाजपा नेताओं में से वसुंधरा राजे सबसे पहली थी। वहीं प्रदेशाध्यक्ष मदन लाल सैनी का अंतिम संस्कार, जयपुर में भव्य योग दिवस, राजसमंद के पूर्व सांसद हरिओम राठौड़ के अंतिम दर्शन तथा भाजपा विधायक दल की बैठक जैसे कई महत्त्वपूर्ण कार्यक्रमों में राजे जरूर पहुंची है। ऐसे में भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसुंधरा राजे को मरुधरा की राजनीति से दूर बताने का दावा मीडियाई उतावलापन ही है।

कांग्रेस को घेरने में गजेन्द्र शेखावत से कहीं आगे वसुंधरा
राजस्थान भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन लाल सैनी के निधन के बाद प्रदेश में एक बार फिर पार्टी चीफ के लिए खींचतान शुरू हो गई है। कुछ मौका परस्त लोग इसके लिए जोधपुर सांसद व केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत का नाम आगे ला रहे हैं। लेकिन वो यह भूल गये हैं कि आज भी राजस्थान के लिए आवाज़ उठाने वालों की पंक्ति में सबसे पहला नाम वसुंधरा राजे का ही आता है। इसका हालिया उदाहरण जयपुर के शास्त्री नगर में 7 वर्षीय बच्ची से हुए दुष्कर्म के बाद भाजपा पदाधिकारियों द्वारा आई टिप्पणी से देखा जा सकता है। गहलोत सरकार के नेतृत्व में राजस्थान में बिगड़ी कानून व्यवस्था पर सवाल उठाने वाली वसुंधरा राजे ने इस घटना को लेकर एक बार फिर राज्य सरकार के खिलाफ जमकर हल्ला बोला है। राजे ने ट्विटर पर लिखा – शास्त्री नगर में सात वर्षीय बच्ची से दरिंदगी का मामला मानवता को शर्मसार कर देने वाला है। घटना के करीब 24 घंटे बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने से जयपुर में हर तरफ आक्रोश व दहशत का माहौल है। बावजूद इसके राज्य सरकार की चुप्पी समझ से परे है। भाजपा सरकार ने दुष्कर्मियों को मृत्युदंड की सजा का प्रावधान किया था, लेकिन अफसोस कांग्रेस सरकार की नाकामी के चलते अब आरोपियों को पकड़ना तक दूभर हो गया है। बात केवल इस घटना की ही नहीं है, बल्कि वसुंधरा राजे हर मुद्दे पर बेबाकी से अपनी प्रतिक्रिया सोशल मीडिया व अन्य माध्यमों के जरिए जनता के सामने रखती है। जबकि गजेन्द्र सिंह शेखावत प्रदेश में घटित घटनाओं से दूरी बनाते नजर आते हैं।

राजे का संगठन कौशल सबसे मजबूत
दो बार मुख्यमंत्री और पांच बार सांसद की जिम्मेदारी संभाल चुकी वसुंधरा राजे राजस्थान में अपने राजनीतिक कौशल के लिए लोकप्रिय है। प्रदेश में भाजपा सहित अन्य पार्टियों के नेताओं से भी उनके बेहतर संबंध हैं। यही कारण है कि भाजपा के अधिकांश विधायक, जिलाध्यक्ष व मंडल प्रतिनिधियों ने वसुंधरा राजे को एक बार पुनः भाजपा प्रदेशाध्यक्ष बनाए जाने की ईच्छा जाहिर कर दी है। हालांकि मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो जमीनी हकीकत से कोसों दूर केन्द्रीय नेतृत्व सांसद गजेन्द्र सिंह शेखावत को राज्य में पार्टी की कमान सौंपने पर विचार कर रहा है। लेकिन यहां भी सच्चाई यही है कि यदि राजस्थान में भाजपा को फिर से मजबूती से खड़ा करना है तो वसुंधरा राजे के अलावा और कोई बेहतर विकल्प नहीं है।

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