नोटबंदी को पूरा हुआ एक साल, जानिए क्या हैं इसके मायनें

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Photo: tezsamachar

भ्रष्टाचार और काले धन क खिलाफ सबसे बड़ी लड़ाई जो देश के 125 करोड़ भार​तवासियों ने एक सा​थ मिलकर लड़ी है, उस नोटबंदी को आज एक साल पूरा हो गया है। पिछले साल 8 नवंबर को ही रात 8 बजे माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक अविश्विसनीय व ऐतिहासिक फैसला लेते हुए पुराने 500 व एक हजार के नोट को चलन से बाहर कर दिया था। साथ ही बैंक या एटीएम से केवल दो हजार प्रतिदिन और 50 हजार रूपए अधिकतम एक सप्ताह में निकासी की छूट दी गई थी जिसे बार में बढ़ाकर चार हजार रूपए प्रतिदिन किया गया था। पूरे देश में एक साथ लागू हुए इस फैसले का मुख्य उद्देश्य देश में कालेधन का पर्दाफाश करना था और एक साल बाद इसके सार्थक परिणाम सामने आने लगे हैं। हालांकि कुछ मुसिबतें आईं, कई युवाओं को नौकरी से भी हाथ धोना पड़ा लेकिन इसके दूरगामी बेहतर परिणामों के लिए यह सब करना आवश्यक था। अब जब नोटंबदी को एक वर्ष पूरा हो गया है, ऐसे में नोटबंदी की व्यापक और ऐतिहासिक सफलता के बारे में जानना तो बनता है। आइए जानते हैं कि बीते एक साल में नोटबंदी का देश की अर्थव्यवस्था पर कितना असर पड़ा।

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आम जनता को मिला फायदा

नोटबंदी का सबसे ज्यादा लाभ आम जनता को मिला है। बैंक लोन पर ब्याज दरों में काफी कमी आई है। नोटबंदी से पहले हाउसिंग लोन पर 9.55 प्रतिशत ब्याज देय था जो अब 8 से 8.35 प्रतिशत के करीब आ गया है। ऐसा ही कुछ हाल कार लोन पर भी है। ब्याज दर कम होने से घर व कार लेना और आसान हो गया है। खाने—पीने सहित रोजमर्रा की जरूरतों की वस्तुओं पर टैक्स कम होने से सामान सस्ता हो गया है। इलेक्ट्रिॉनिक सामानों के दाम भी गिरे हैं जिससे आम जनता को फायदा मिला है।

आतंकवाद और नक्सलवाद की कमल टूटी

Photo: lokdesh.com

नोटबंदी का सबसे ज्यादा असर जिस पर पड़ा है, वह है आतंकवाद और नक्सलवाद। नोटबंदी के दौरान यानि पिछले एक वर्ष में देशभर में कुल 7.62 लाख जाली नोट पकड़े गए हैं जिससे आतंकवाद और नक्सलवाद दोनों पर गहरी चोट लगी है। बीते एक साल में कश्मीर जैसे नक्सलवादी इलाकों में पत्थरबाजी की घटनाओं में 75 प्रतिशत तक की कमी आई है जबकि वामपंथी उग्रवाद की घटनाएं 20 प्रतिशत से अधिक कम हो गई हैं।

कालेधन का हुआ पर्दाफाश

अचानक से नोटबंदी के बाद 17.73 लाख संदिग्ध कालेधन के मामलों का ब्यौरा वित्त विभाग के सामने खुला है। 23.22 लाख खातों में करीब 3.68 लाख करोड़ रूपए की नकदी जमा होने की बात भी सामने आई है। 6 लाख करोड़ रूपए के हाई वैल्यू नोट प्रभावी रूप से कम हुए हैं। साथ ही देश की जनसंख्या के 0.00011 प्रतिशत लोगों ने देश में उपलब्ध नकदी का 33 प्रतिशत हिस्सा बैंक खातों में जमा किया है।

साफ—सुथरी अर्थव्यवस्था की ओर एक मजबूत व दूरगामी कदम

माननीय प्रधानमंत्रीजी के नोटबंदी के फैसले से एक साफ—सुथरी अर्थव्यवस्था की ओर देश ने एक मजबूत और दूरगामी कदम बढ़ाया है। बीते एक वर्ष में कालेधन में डील करने वाली शेल कपंनियों का बड़ा गोरखधंधा उजागर हुआ है। इन कंपनियों पर हुई सर्जिकल सट्राइक के बाद देश में कुल 2.24 लाख शेल कंपनियों पर ताला लग गया है जिससे कालेधन पर काफी हद तक लगाम लगी है। नोटबंदी के बाद 35 हजार शेल कपंनियों द्वारा करीब 58 हजार बैंक खातों में 17 हजार करोड़ रूपए का लेनदेन सामने आया है। इसके अलावा, कर्मचारियों को उनका पूरा वेतन सीधे उनके खातों में डिजिटल ट्रांजेक्शन होने लगा है। पिछल एक साल में 1.01 करोड़ ईपीएफओ में और 1.3 करोड़ कर्मचारी ईएसआईसी में पंजीकरण हुए हैं। इसी के चलते सभी को सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ पहुंचा है।

टैक्सपेयर्स की संख्या में इजाफा, डिजिटल लेनदन बढ़ा

नोटबंदी के बाद बीते एक साल में टैक्सपेयर्स की संख्या में हुई 26.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2015—16 में कुल टैक्सपेयर्स की संख्या 65.53 लाख थी जो 2016—17 में बढ़कर 84.214 लाख हो गई है। ई—रिटर्न की संख्या में भी 27.95 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है। वर्ष 2017—18 में 3.01 करोड़ ई—रिटर्न हुई हैं जबकि यह आंकड़ा 2016—17 में केवल 2.35 करोड़ था।

इस दौरान डिजिटल लेनदेन में अविश्वसनीय वृद्धि देखी जा सकती है। अगस्त, 2016 में 87 करोड़ रूपए का डिजिटल लेनदेन हुआ था जो अगस्त, 2017 में बढ़कर 138 करोड़ हो गया। डिजिटल लेनदेन का बढ़ा आंकड़ा इससे समझ आ सकता है कि अब देशभर में केवल 15.11 लाख पीओएस मशीने उपलब्ध थी जो नोटबंदी के बाद केवल एक साल में 13 लाख नई पीओएस मशीनें इस संख्या में और जुड़ गई हैं।

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