राजस्थानः मानसून की बेरुखी से प्रदेश ‘सूखे’ की कगार पर, अधिकांश जिलों में अकाल की स्थिति

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    सावन के पहले सोमवार को एक ओर भगवान शिव को जलाभिषेक कर उन्हें प्रसन्न करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का मंदिरों में तांता लगा हुआ है वहीं दूसरी ओर काफी मिन्नतों के बाद भी इन्द्रदेव प्रदेश पर प्रसन्न नहीं हो रहे हैं। सावन में नागरिक अच्छी बारिश की कामना करते हैं लेकिन इस बार वर्षा सामान्य से बेहद कम हुई है। प्रदेश के अधिकतर जिलों में मानसून की बेरुखी की चलते सूखे के हालात उत्पन्न हो गए हैं। जुलाई माह के 22 दिन बीत जाने के बावजूद मानसून ने अभी तक प्रदेश में गति नहीं पकड़ी है जिसका खामियाजा आने वाले समय में किसानों के साथ-साथ आम जनता को उठाना पड़ेगा।

    बीते 13 साल में इस वर्ष का सबसे कमजोर सावन

    इन्द्रदेव को खुश करने के लिए नागरिक विभिन्न तरह के हवन-यज्ञ आयोजित कर रहे है लेकिन अभी तक मानसून ने सही तरह से दस्तक नहीं दी है। कमजोर पड़े मानसून ने लोगों की बेचैनी बढ़ा दी है। इस बार का सावन पिछले 13 सालों में सबसे कमजोर बताया जा रहा है। अभी तक बारिश का आंकड़ा 90 मिमी तक ही पहुंच पाया है। मौसम विभाग की माने तो जुलाई माह के अंत तक बारिश की संभावना ना के समान ही बताई जा रही है। बारिश नहीं होने से प्रदेश के अधिकांश क्षेत्र सूखे के कगार पर पहुंच चुके हैं। आगे भी यही स्थिति रही तो हालात अधिक भयावह हो सकते हैं।

    सामान्य से कम बारिश होने से प्रदेश में अकाल के हालात पैदा हो जाएंगे, पशुधन के लिए चारे और पानी का संकट खड़ा जाएगा तथा आमजीवन बुरी तरह प्रभावित होगा। बारिश नहीं होने से प्रदेश में सबसे प्रमुख समस्या पेयजल की खड़ी हो गई है। बारिश नहीं होने व भीषण गर्मी की वजह से अधिकतर बांध सूख चुके हैं और सिंचाई व पीने के लिए पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। राज्य सरकार को समय रहते किसी भी तरह की आपात स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त प्रबंध कर लेने चाहिए अन्यथा हालात बिगड़ सकते है।

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