गहलोत के बजट से इस बार नदारद था ‘मदरसा’ शब्द, अल्पसंख्यक समुदाय हुआ काफी नाराज

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जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत बुधवार को तीसरी बार राजस्‍थान सरकार का बजट विधानसभा में पेश किया। कोरोना वायरस के बाद राजस्थान में जादूगर कहे जाने वाले गहलोत का बजट पिटारा आमजनता को निराशा ही हाथ लगी। अल्पसंख्यक समुदाय लोगों भी काफी मायूस हुए है। बुनियादी बिंदुओं को छोड़ इस बार अल्पसंख्यक समुदाय के लिए बजट में न कोई नई घोषणा की गई। बजट स्पीच से इस बार मदरसा शब्द नदारद था। तालीम को बढ़ावा देने और अल्पसंख्यक समुदाय के लिए कोई नया प्लान तैयार नहीं किया गया।

सरकार तक पहुंचा गई थी ये मांगे
एमएसडीपी योजना के तहत पहले जारी कार्य बजट में रखे गए हैं, जिनमें 8 होस्टल, 3 रेजिडेंशियल स्कूल, 3 माइनॉरिटी गर्ल्स रेजिडेंशियल स्कूल और इतने ही बालक छात्रावास बनाए जाएंगे। इसके अलावा 17 स्वास्थ्य केंद भी बनाए जाएंगे। बजट से पहले उर्दू से लेकर मदरसा और तालीम से लेकर रोजगार तक कई मांगें अल्पसंख्यक समुदाय की ओर से सरकार को पहुंचाई गईं थीं। इस मामले में अल्पसंख्यक समुदाय के और अल्पसंख्यक मामलात विभाग के मंत्री से लेकर समाज के सभी विधायकों ने भी मांगें पहुंचाई। इस बजट में मदरसा पैरा टीचर्स की मांगों पर कोई नतीजा सामने नहीं आया।

बजट से अल्पसंख्यक समुदाय मायूस
बजट के भाषण में अल्पसंख्यक समुदाय के लिए कोई नई योजना की बात नहीं कही गई। न वक्फ जायदादों की सुरक्षा और न कब्रिस्तान के विकास पर बात हुई। हज हाउस को भी इस बार बजट से दूर रखा गया। राजस्थान मुस्लिम फोरम, जमात ई इस्लामी हिन्द, राजस्थान मुस्लिम प्रोग्रेसिव फ्रंट, मदरसा शिक्षा सहयोगी संघ समेत कई संगठनों ने सरकार को 8 से 14 सूत्रीय मांगे भेजी थीं, लेकिन बजट में उसके अनुसार कुछ नजर नहीं आया है।

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