लंपी स्किन से 14 हजार मौत: गहलोत सरकार ने 4 साल से नहीं कराया इंश्योरेंस, पशुपालकों को 70 करोड़ नुकसान

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जयपुर। राजस्थान में पिछले कुछ दिनों से लंबी स्किन की बीमारी का कहर जारी है। इस महामारी की वजह से अब तक हजारों पशु अपनी जान गवा चुके हैं। इसके साथ ही लाखों की संख्या में अभी संक्रमित है। पशुपालकों को इससे करीब 70 करोड़ का नुकसान हो चुका है। चौंकाने वाली बात यह है कि सरकार पिछले 4 साल से इंश्योरेंस नहीं कर रही है। यह स्कीम ठप पड़ने के कारण अब पशुपालकों को यह नुकसान उठाना पड़ रहा है। 20वीं पशुगणना के अनुसार राजस्थान में गौवंश 1.39 करोड़ हैं। गौवंश की संख्या में राजस्थान देश में छठे नम्बर पर है। 1.37 करोड़ भैंसों के साथ राजस्थान देश में दूसरे नम्बर पर है।

पशुपालकों और किसानों की सरकारों को चिन्ता नहीं
पिछले 4 साल से प्रदेश में पशुपालकों के पशुओं की इंश्योरेंस स्कीम ही ठप पड़ी है। पशुपालकों और किसानों की सरकारों को कितनी चिन्ता है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि राजस्थान का पशुपालन विभाग 1 अक्टूबर 2018 से पशुधन बीमा योजना नहीं चला रहा है। जिसका खामियाजा अब लंपी वायरल डिजीज के मुश्किल वक्त में पशुपालकों को उठाना पड़ रहा है।

अब तक 14,045 की मौत
राजस्थान में सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक लंपी से अब तक 14 हजार 45 की मौत हो चुकी है। पिछले 9 दिन में ही सवा 2 लाख पशु लंपी से संक्रमित हुए हैंए 10 हजार की मौत हो गई है। इससे पहले कुल 4 हजार की मौत हुई थी। केवल लंपी डिजीज में मरे पशुओं को इंश्योरेंस हुआ होता, तो 50 हजार के हिसाब से राजस्थान के पशुपालकों को 70 करोड़ 22 लाख 50 हजार रुपए मिलते। अफसोस इन पशुपालकों और किसानों को मुआवजा नहीं मिल सकेगा।

4 साल में क्यों नहीं हुआ पशुओं का इंश्योरेंस
सूत्रों के अनुसार 2018-19 में पशु बीमा के लिए बीमा कंपनियों ने भारत सरकार के लेवल पर तय प्रीमियम रेट से ज्यादा इंश्योरेंस प्रीमियम रेट दीं। राजस्थान सरकार ने पशुओं का इंश्योरेंस ही नहीं करवाया। साल 2019-20 में भारत सरकार से तय समय पर पैसा मिलने मिलने का हवाला देते हुए टेंडर जारी नहीं किया गया। इसके बाद 2020-21 में किसी भी इंश्योरेंस कंपनी ने टेंडर प्रोसेस में ही हिस्सा नहीं लिया। साल 2021-22 में भारत सरकार से मिली संशोधित प्रीमियम रेट के अनुसार 28 अक्टूबर 2021 को जब टेंडर निकाला गया। तो सिर्फ एक इंश्योरेंस कंपनी से हिस्सा लिया। जिसने प्रदेश के 7 में से केवल दो सम्भाग जयपुर और अजमेर के लिए टेंडर भरे। इस कारण पशु इंश्योरेंस स्कीम लागू नहीं हो सकी।